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सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

मन

आप जो भी करें
अच्छा या बुरा
आपका मन सब जनता है

आप किसी से कुछ भी छुपाए
मन से कुछ नहीं छिपा पाएंगे

आप दुनिय से कितनी भी दूर भाग जाएँ
मन से कहीं भाग नहीं पायेंगे

आप कहीं भी जायेंगे
अपने मन को हमेश अपने ही साथ ही पाएंगे

जिंदगी की रेल

हर बार
एक नयी जगह
होता है धमाका
एक नयी जगह खेला जाता है
आतंक का खेल
फिर भी
ज्यों की त्यों चलती है
ज़िन्दगी की रेल

इस आतंक के कारण
कितने घरों के चिराग बुझ गए
कितनी अबलायें हुईं विधवा
पर
हम बेचारे आम आदमी
क्या कर पाए ?
समाचार सुना, पढ़ा
और भूल गए
न कोई सहानुभूति
न कोई चिंता
सवेरे वही रोज़ का खेल
वही हमारी
जिंदगी की रेल

आदमी खुदा

आदमी
अपने इर्द गिर्द
कुछ लोगों को पाकर
खुद को
" खुदा" समझने लगता है

क्यों भूल जाता है
कि
खुदा तब भी था
जब वह खुद नहीं था
खुदा तब भी रहेगा
जब वह खुद भी नहीं रहेगा

सही पहचान

कुछ लोग
अक्सर लोगों को
सही पहचान नहीं पाते हैं

जिन्हें वे अपना समझते हैं
जिनके लिए वे जान पर खेल जाते हैं
वे लोग ही पराये निकलते हैं
बस
अपना बनकर
और
अपना बनाकर
महज
अपना काम निकलते हैं
और फिर
इस तरह छोड़ जातें हैं
जैसे
कोई कामुक पुरुष
अपनी क्षुधा शांत कर
वेश्या को छोड़ जाता है

शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

कबूतर या गिद्ध

लोग
चेहरे पर चेहरा लगते हैं

ऊपर से
प्यार, प्रेम, अपनत्व
जताते हैं
लेकिन वास्तव में
सिर्फ अपना स्वार्थ
सिद्ध करते हैं
ना जाने
क्यों भूल जाते हैं
कि
बनावटी चेहरा
जब हट जायेगा
कबूतर के पीछे छिपा गिद्ध
सबको नज़र आ ही जायेगा

बचपन

क्यों हर इन्सान
बचे से
बड़ा होने को आतुर रहता है

क्यों जल्दी बचपन छोड़कर
बड़ा होना चाहता है
जबकि जनता है
कि
बड़े होकर जिमेदारियां ओदनी पड़ेंगी
और
जब बड़ा हो जाता है
तो
बस कहता ही रहता है
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन
या फिर
गिव मी सम सन शाइन
गिव में सम रेन
गिव मी अनादर चांस
आई वांट तो ग्रो अप वंस अगेन

अजीब रिश्ते

कल तक जो
हमेशा साथ निभाने का करते थे वादा
आज एक दूसरे को
एक आँख नहीं सुहाते

न जानने क्यों
दुनिया के ऐसे अजीब रिश्ते हैं
कुछ कदम साथ चलते हैं
फिर
अपनी अपनी राह पर
ऐसे चलते हैं
जैसे एक दूसरे को
पहचानते तक नहीं

इश्क

एक दूजे की ख़ामोशी
जब
एक दूजे के लिए आवाज़
बन जाये
तो
बस समझ लीजिये
कि
आपको
एक दूजे से
हो गया है
इश्क

सृष्टि दृष्टि

आप कभी बदल नहीं सकते - सृष्टि
बदलकर देखिये - दृष्टि
सारा संसार
ही
बदला बदला नज़र आएगा

हर असंभव
संभव
होता नज़र आएगा

अमन की आशा

अमन की आशा
हम करते हैं
अमन की आशा
में
जीते है और मरते हैं

आशा यही कि
कभी तो बर्फ पिघलेगी
कभी तो सरहदें टूटेंगी
कभी तो
हिन्दुस्तानी भाई
अपने
पाकिस्तानी भाई
से
खुलकर मिल पायेगा
दिल कि बात
दिल से
कर पायेगा

दी सीक्रेट

कहते हैं
जैसा आप सोचते हैं
वैसा ही पाते हैं

आप सोचेंगे अछ्हा
तो पाएंगे
सब कुछ अच्छा ही अच्छा

आप सोचेंगे बुरा
तो आयेगा
जो होगा सिर्फ बुरा ही बुरा

सोच बदलकर देखिये
जीवन ही बदल जायेगा
और
आपकी दुनिया ही बदल जाएगी

दिल है कि मानता नहीं

दिल है कि मानता नहीं
और
हम हैं कि
दिल कि हर बात मानते हैं

दिल कि बात जो मानते हैं
वो जिंदादिल जीना जानते हैं
दिल नहीं दिमाग कि जो मानते हैं
वो जीते क्या हैं
बस
खाक छानते हैं