Amazon Deals

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

राम के नाम का रावण




राम सिंह 
के 
जो माता  पिता होंगे 
जहाँ भी होंगे 
सोचते होंगे 
किस घडी में तुझें जन्मा था 
क्या सोच कर तुम्हारा नाम 
राम 
रखा था 

उन्हें  क्या पता था 
कि 
जिसे वो  राम का नाम दे रहें हैं 
वो किसी दिन 
इतना बड़ा 
रावण 
बन जायेगा 

दामिनी




दामिनी मर गयी
शायद
कहा जा सकता है
लिखा जा सकता है
और
पढ़ा जा सकता है

पर
प्रशन है
क्या दामिनी मर सकती है ?

दामिनी जो भी थी
जो भी उसका सही नाम था
दामिनी सबको याद रहेगी
दामिनी सबको याद कराती रहेगी
आम जन
चुप होकर बैठ मत जाना

जो आज दामिनी के साथ हुआ है
फिर
कभी भी कहीं भी किसी के भी साथ हो सकता है
सत्ता वालों अब तो जाग जाओ
नारियों पर हो रहे अत्याचार
को
मूक दर्शक की तरह मत देखो
कुछ ठोस करो

गाँधी जी के तीन बन्दर
नयी सीख दे रहें हैं
बुरा होते देखो मत
बुरा हो तो चुप रहो मत
बुरा हो तो बुराई का विरोध सुनो
बुरा हो तो बुरा करने वालों
का
ऐसा बुरा करो
कि
आगे कोई भी ऐसा बुरा कर ही नहीं पाए

दामिनी जिंदा है
दामिनी मरती नहीं है
दामिनी मर सकती नहीं है

रविवार, 23 दिसंबर 2012

यक्ष प्रश्न


 
रामसिंह द्वारा दामिनी का बलात्कार 
महज 
एक लड़की का बलात्कार नहीं है 
एक प्रश्न है 
सारे समाज के सामने 

जवाबदेही है 
हम सबकी 
कब तक ऐसे दरिन्दे 
मासूम पर अत्याचार करते रहेंगे 
कब तक हम सब मूक दर्शक बने रहेंगे 
समाज कब तक ऐसी घटनानों को 
नपुसंक की तरह देखता रहेगा 
सरकारें कब तक 
कुछ कठोर कार्यवाही के नाम पर 
कुछ नहीं करेंगी 
कब तक आप जांच करवाते रहेंगे 
कब तक अदालतों में 
पीडिता का 
बार बार बलात्कार होता रहेगा 
और कब तक 
अदालती कार्यवाही देखें सुनने वाले 
चटखारे ले लेकर पीडिता के बयां सुनते रहेंगे 
कब तक 
आरोपी जमानत पर रिहा होते रहेंगे 
कब तक 
पीडिता 
और पीडिता का परिवार 
अपने पर हुआ अत्याचार भुगतता रहेगा 
उत्तर  एक ही है 
ये सब यूँ ही होता रहेगा 
ये सब यूँ ही चलता रहेगा 
जब तक 
सरकारें ऐसे ही नाकारा रहेंगी 
जब तक हम इंसान 
इंसान बनकर
इन दरिंदो को कड़ी सजा नहीं देंगे 

यदि हम ऐसे ही नपुंसक बने रहेंगे 
तो 
जो आज हुआ है 
कल फिर होगा 
और ऐसे ही होता र्रहेगा 
और फिर 
एक नया दरिंदा होगा 
एक नयी पीडिता  होगी 
एक नयी पीडिता का  परिवार होगा 
सब यूँ ही चलता रहेगा 
 
यह यक्ष प्रश्न 
हमारे 
सामने मुह बाये खड़ा है 
यदि इसका आज जवाब नहीं दिया गया 
तो 
आने वालीं पीदियाँ 
हमें माफ़ तो नहीं करेंगी 
बल्कि 
पीड़ी दर पीड़ी कोसती रहेंगी