रविवार, 30 जून 2013

इंतजार 

 तीरथ करने जो गए 
 कुछ लौट पाए 
कुछ रह गए 
जो रह गए वहीँ 
जिंदा या मुर्दा 
कुछ पता नहीं किसी का 

तीरथ जो हैं मरघट बने पड़े हैं 
तीर्थयात्री मुर्दों के ऊपर मुर्दो से  अटे पड़े हैं 

किसी ने भाई ,बेटा ,पति,पोता खोया 
किसी ने बहन,बेटी पत्नी ,पोती को है खोया 
जिसने जो खोया वो बस है रोया 
कब खबर आएगी 
अच्छी खबर आएगी या फिर बुरी 
कुछ खबर नहीं 
जब आएगी तब आएगी 
तब तक सिर्फ तकना है 
कि 
कभी तो कोई आएगा 
अपनों की 
कुछ तो खबर लायेगा
 
इंतजार है 
इंतजार रहेगा 
कहीं दिनों का 
कहीं महीनों का 
और 
कहीं कहीं तो शायद 
पूरा जीवन 
इंतजार 

प्रकृति का बदला 


प्रकृति 
इंसान 
को 
सब कुछ देती है 
पर 
इंसान 
अपने लालच में 
प्रकृति 
को भी नहीं छोड़ता  है
इंसान 
ने 
जब जब 
प्रकृति 
को 
छेड़ा है 
प्रकृति 
ने भी 
इंसान 
को कहाँ छोड़ा है 
प्रकृति पहले चेताती है 
पर 
इंसान नहीं मानता है 
तो 
अपना बदला लेना भी जानती है 
और 
जब बदला लेती है 
तो 
किसी 
एक  
इंसान 
की गलती 
की 
सजा 
कोई  
दूसरा 
इंसान
क्यों 
पाता 
है  
समझ में नहीं आता है  

शनिवार, 15 जून 2013

पिता 

पिता जगत हैं 
पिता जहान हैं 
पिता  तो  हमेशा महान हैं  

रविवार, 2 जून 2013

बुद्ध और बुद्धत्व


गौतम  
सिद्धार्थ 
बुद्ध    
गौतम बुद्ध
या 
बुद्ध 
किसी भी 
नाम से 
पुकारिए

ये   वही 
कपिलवस्तु के राजकुमार हैं 
जिन्होंने 
अपने सारे वैभव विलास 
राज पाट  त्यागे 
अपनी पत्नी यशोधरा 
और 
प्यारे से पुत्र राहुल 
को तजकर 
चल पड़े 
सभी का 
दुःख निवारण करने 
इंसान 
इंसानों 
के दुःख के बारे में सोचा 
और 
अपना 
सारा जीवन 
और 
सब कुछ 
उनके दुःख मिटाने 
के लिए 
खपा  दिया

सुजाता की खीर से 
बोधिवृक्ष के नीचे 
सिद्धार्थ गौतम 
ने 
बुद्धत्व पाया 
और 
बुद्ध 
हो गए 

काश हम सब इंसान 
उनका रास्ता 
अपना पाते 
अपने जीवन में 
थोडा सा बुद्धत्व 
ला पाते 
चारों और फैले
अन्धकार में 
प्रकाश फैला पाते 
संसार को 
जीते जी ही 
स्वर्ग बना जाते